
भोगांव (मैनपुरी)। क्षेत्र के ग्राम नगला शीश में पत्रकार चंद्रपाल शाक्य के आवास पर आयोजित एक विशेष वार्ता कार्यक्रम में प्रसिद्ध बौद्ध कथा वाचिका राजेश्वरी बौद्ध ने कहा कि बौद्ध धर्म केवल एक धर्म नहीं, बल्कि जीवन जीने की श्रेष्ठ कला है। यह मानव जीवन को सुख, शांति, करुणा और सद्भाव का मार्ग दिखाता है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी हजारों वर्ष पहले थीं।
राजेश्वरी बौद्ध ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “शिक्षा शेरनी का दूध है, जो पियेगा वह दहाड़ेगा और जो नहीं पियेगा वह पछताएगा।” उन्होंने कहा कि शिक्षित व्यक्ति अपने अधिकारों और कर्तव्यों को बेहतर ढंग से समझता है तथा समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जीता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि सामाजिक ज्ञान भी अर्जित करें, क्योंकि दोनों प्रकार की शिक्षाएं व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक हैं।

उन्होंने कहा कि आज गांव-गांव में आयोजित हो रही बौद्ध कथाओं के माध्यम से भगवान बुद्ध के संदेश घर-घर तक पहुंच रहे हैं। बुद्ध का दर्शन मानवता, समानता और भाईचारे का संदेश देता है तथा हमें स्वयं जीने और दूसरों को भी जीने देने की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम में उपस्थित बौद्ध कथा वाचक श्याम सुंदर बौद्ध ने कहा कि भगवान बुद्ध द्वारा बताए गए मार्ग पर चलकर व्यक्ति अपने जीवन को सुखमय और सफल बना सकता है। उन्होंने कहा कि बुद्ध की शिक्षाएं मानव जीवन को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती हैं। बुद्ध के विचारों और सिद्धांतों के कारण भारत की पहचान विश्व स्तर पर स्थापित हुई तथा देश को विश्व गुरु के रूप में सम्मान मिला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज को बुद्ध के करुणा, अहिंसा और सदाचार के संदेश को अपनाने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने भगवान बुद्ध के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर सुरेश चंद्र शाक्य, ब्रजरानी,शाक्य, विकास शाक्य, जितेंद्र कुमार शाक्य, काव्य शाक्य सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम का वातावरण बौद्ध विचारों, सामाजिक जागरूकता और शिक्षा के महत्व पर केंद्रित रहा, जहां उपस्थित लोगों ने वक्ताओं के विचारों को गंभीरता से सुना और उन्हें अपने जीवन में अपनाने का संकल्प व्यक्त किया।
