
मैनपुरी। रज्जोदेवी कबीर आश्रम में महंत अमर साहब के नेतृत्व में संत सम्राट कबीर साहेब जी की जयंती पर आयोजित दो दिवसीय सत्संग एवं कबीर संदेश यात्रा का सोमवार को श्रद्धा और उत्साह के साथ समापन हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संतों, श्रद्धालुओं एवं कबीर पंथ के अनुयायियों ने भाग लेकर संत कबीर की वाणी और उनके बताए सत्य, प्रेम तथा मानवता के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
कबीर जयंती के अवसर पर विशाल शोभायात्रा का शुभारंभ नगर पालिका अध्यक्ष संगीता आलोक गुप्ता ने आश्रम से झंडी दिखाकर किया। शोभायात्रा बस स्टैंड, तांगा स्टैंड, बड़ा चौराहा, संता-बसंता चौराहा, आगरा रोड और ज्योति तिराहा होते हुए कचहरी रोड स्थित कबीर आश्रम पहुंची। यात्रा के दौरान श्रद्धालु संत कबीर के साखी, दोहे और भजनों का गायन करते हुए चल रहे थे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने संतों का स्वागत एवं जलपान की व्यवस्था भी की गई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में कबीर आश्रम मुजापुर (बाराबंकी) के संत निष्ठा साहब उपस्थित रहे। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि जो व्यक्ति गुरु के वचनों से विमुख हो जाता है, उसे जीवन में दुख और भटकाव का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि आत्मा का चिंतन और मन का संयम ही मानव जीवन का वास्तविक आधार है। सुख और दुख बाहरी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि मन की अवस्था से उत्पन्न होते हैं। संत कबीर का पूरा दर्शन आत्मज्ञान, सद्गुरु की शरण और आडंबरों से दूर रहकर सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
आश्रम के महंत अमर साहब ने संत कबीर के प्रसिद्ध दोहे—
“संत मिलन को चालिए, तजि माया अभिमान।
ज्यों-ज्यों पग आगे धरें, कोटि यज्ञ समान।।”
का भावार्थ बताते हुए कहा कि संतों का संग मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। संतों के पास जाने के लिए अहंकार, लोभ और माया का त्याग करना आवश्यक है। जो व्यक्ति विनम्रता के साथ संतों की संगति करता है, उसके प्रत्येक कदम का पुण्य करोड़ों यज्ञों के समान फलदायी होता है। कबीर के अनुसार बाहरी कर्मकांड से अधिक महत्व सत्संग, सद्गुरु की शरण और आत्मशुद्धि का है।
इस अवसर पर सरस्वती योगानंद महाराज, आत्माराम दास,नरेंद्र सिंह वर्मा, चेतन दास, भोलेनाथ, सियाराम दास, राजेंद्र दास, हरिओम दास,सुभाष दास, राम सेवक दास, कर्नल सुरेश चंद्र यादव ने सभी संतो को शोल उड़ाकर समानित किया, कैप्टन श्यामवीर सिंह, धर्मवीर सिंह, हरिश्चंद्र यादव, राममूर्ति देवी, चंद्रपाल शाक्य, बेचेलाल शास्त्री सहित बड़ी संख्या में संत एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
