सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में 70 वर्षीय कारोबारी की मौत के बाद सामने आई संवेदनहीनता की दर्दनाक तस्वीर

काल्पनिक छायाचित्र
मैनपुरी/सैफई। रिश्तों की अहमियत और इंसानियत को झकझोर देने वाली एक घटना सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी से सामने आई है। जनपद एटा निवासी 70 वर्षीय कारोबारी राजकुमार सक्सेना का अस्पताल में कई दिनों तक उपचार चलने के बाद निधन हो गया। आरोप है कि निधन के बाद उनके परिवार का कोई सदस्य अंतिम संस्कार के लिए नहीं पहुंचा। अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों ने जब उनके बड़े बेटे से मोबाइल पर संपर्क किया तो कथित तौर पर उसने पिता से कोई रिश्ता होने से इनकार करते हुए शव के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी लेने से भी मना कर दिया।
मृतक के परिवार में तीन बेटे, एक बेटी और पत्नी होने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि पत्नी भी बेटों के कहने पर अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुईं। घटना की जानकारी मिलने के बाद अस्पताल में मौजूद स्टाफ और अन्य लोग भी हैरान रह गए। मामला सामने आने के बाद यह घटना परिवार, रिश्तों और बदलती सामाजिक संवेदनाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर रही है।
रक्तदाता समूह ने निभाई इंसानियत की जिम्मेदारी
जब इस घटना की जानकारी रक्तदाता समूह के प्रमुख शरद तिवारी को हुई तो उन्होंने अपनी टीम के साथ सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी पहुंचकर बुजुर्ग के शव को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई देने का निर्णय लिया। टीम ने एंबुलेंस के माध्यम से शव को इटावा स्थित यमुना घाट पहुंचाया, जहां विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
रक्तदाता समूह के सदस्यों के इस कदम की लोगों ने सराहना की। जब अपने ही अंतिम समय में साथ छोड़ गए, तब गैरों ने इंसानियत का फर्ज निभाते हुए बुजुर्ग को सम्मानजनक अंतिम विदाई दी। घटना ने यह संदेश दिया कि रिश्ते केवल खून से नहीं, बल्कि संवेदनाओं और जिम्मेदारी से भी कायम रहते हैं।
संपत्ति को लेकर भी सामने आई बात
बताया जा रहा है कि राजकुमार सक्सेना के पास काफी संपत्ति थी, जिसे उनके बेटों द्वारा अपने नाम करा लिए जाने की बात कही जा रही है। परिजनों के अनुसार, जीवन के अंतिम समय में बुजुर्ग के पास अपने लिए बहुत कुछ नहीं बचा था। हालांकि संपत्ति से जुड़े इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन घटना ने संपत्ति और पारिवारिक रिश्तों के बीच बदलते समीकरणों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक पिता अपने बच्चों की परवरिश, शिक्षा और भविष्य के लिए जीवनभर मेहनत करता है। बच्चों को काबिल बनाने में अपना जीवन लगा देता है। ऐसे में बुढ़ापे में यदि वही माता-पिता अकेले पड़ जाएं तो यह केवल एक परिवार की समस्या नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चिंतन का विषय बन जाता है।
आने वाली पीढ़ी के लिए बड़ा सवाल
राजकुमार सक्सेना की मौत के बाद सामने आई यह घटना समाज के लिए एक गंभीर संदेश छोड़ गई है। आधुनिक जीवनशैली और बदलते पारिवारिक संबंधों के बीच बुजुर्ग माता-पिता के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी बनाए रखना बेहद जरूरी है। धन-संपत्ति जीवन का हिस्सा हो सकती है, लेकिन रिश्तों की संवेदना और मानवता का कोई विकल्प नहीं है।
इस घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि क्या संपत्ति और आर्थिक स्थिति के आधार पर रिश्तों की अहमियत तय होने लगी है? यदि ऐसा है तो समाज को समय रहते इस दिशा में आत्ममंथन करने की जरूरत है। राजकुमार सक्सेना को उनके परिजनों ने अंतिम विदाई नहीं दी, लेकिन रक्तदाता समूह ने आगे बढ़कर उनका अंतिम संस्कार कर यह साबित किया कि इंसानियत आज भी जिंदा है।
